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mahabharat 5.145.3: तुम मेरे पहले पुत्र हो जो मैंने कन्या अवस्था में जन्म लिया था। जब मैं राजा कुंतीभोज के घर में थी, तब मैंने तुम्हें गर्भ में धारण किया था; इसलिए हे पुत्र! तुम पार्थ हो।   |   mahabharat अध्याय 5.145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.145.3 
कानीनस्त्वं मया जात: पूर्वज: कुक्षिणा धृत:।
कुन्तिराजस्य भवने पार्थस्त्वमसि पुत्रक॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तुम मेरे पहले पुत्र हो जो मैंने कन्या अवस्था में जन्म लिया था। जब मैं राजा कुंतीभोज के घर में थी, तब मैंने तुम्हें गर्भ में धारण किया था; इसलिए हे पुत्र! तुम पार्थ हो।
 
You are the first son born to me when I was a girl. I conceived you while I was in the house of King Kunti Bhoja; hence, son! You are Partha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)