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श्लोक 5.145.2  |
कुन्त्युवाच
कौन्तेयस्त्वं न राधेयो न तवाधिरथ: पिता।
नासि सूतकुले जात: कर्ण तद् विद्धि मे वच:॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| कुंती बोली- कर्ण! तुम राधा के नहीं, कुंती के पुत्र हो। तुम्हारे पिता अधिरथ नहीं हैं और तुम्हारा जन्म सूत कुल में नहीं हुआ है। मेरी बात मानो॥2॥ |
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| Kunti said- Karna! You are not Radha's son, but Kunti's. Your father is not Adhiratha and you were not born in a Sut family. Believe what I say.॥2॥ |
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