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mahabharat 5.145.11: कर्ण! जिस प्रकार महान यज्ञ की वेदी पर देवताओं से घिरे हुए ब्रह्मा जी शोभायमान होते हैं, उसी प्रकार तुम भी अपने पाँचों भाइयों से घिरे हुए शोभायमान होगे।   |   mahabharat अध्याय 5.145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.145.11 
कर्ण शोभिष्यसे नूनं पञ्चभिर्भ्रातृभिर्वृत:।
देवै: परिवृतो ब्रह्मा वेद्यामिव महाध्वरे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! जिस प्रकार महान यज्ञ की वेदी पर देवताओं से घिरे हुए ब्रह्मा जी शोभायमान होते हैं, उसी प्रकार तुम भी अपने पाँचों भाइयों से घिरे हुए शोभायमान होगे।
 
Karna! Just as Lord Brahma looks beautiful surrounded by the gods on the altar of a great sacrifice, in the same way you too will look beautiful surrounded by your five brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)