श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 145: कुन्तीका कर्णको अपना प्रथम पुत्र बताकर उससे पाण्डवपक्षमें मिल जानेका अनुरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.145.1 
कर्ण उवाच
राधेयोऽहमाधिरथि: कर्णस्त्वामभिवादये।
प्राप्ता किमर्थं भवती ब्रूहि किं करवाणि ते॥ १॥
 
 
अनुवाद
कर्ण बोला- देवि! मैं राधा और अधिरथ का पुत्र कर्ण हूँ और आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ। आपने यहाँ आने का कष्ट क्यों किया? बताइए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥1॥
 
Karna said— Devi! I am Karna, the son of Radha and Adhiratha and I bow at your feet. Why have you taken the trouble to come here? Tell me, what service can I render to you?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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