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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.144.8 
क्रियमाणे बलाद् धर्मे कुरुभि: को न संज्वरेत्।
असाम्ना केशवे याते समुद्योक्ष्यन्ति पाण्डवा:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कौरवों के इस हठ से, जिसे वे अपना धर्म मानते हैं, कौन चिंतित नहीं होगा? भगवान कृष्ण शांति-संधि के अपने प्रयास में असफल हो चुके हैं; अतः पांडव भी अब युद्ध के लिए प्रबल प्रयास करेंगे।
 
Who will not be worried about this obstinacy of the Kauravas, which they consider as their religion? Lord Krishna has failed in his attempt to make peace; hence the Pandavas will now also make great efforts for war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)