Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.144.23-24: मैं अपने मार्ग में आने वाले सब प्रकार के दोषों को दूर करके पिता की दृष्टि में अपने सदाचार की रक्षा करती रही। मैंने सोचा, मैं क्या करूँ, जिससे पुण्य कमा सकूँ और अपराधी न बनूँ। ऐसा सोचकर मैंने मन ही मन उस ब्राह्मण देवता को प्रणाम किया और उस मन्त्र को पाकर, कौतूहलवश तथा बुद्धिहीन होकर उसका प्रयोग करने लगी। उसका फल यह हुआ कि मुझे अपनी कन्या अवस्था में ही भगवान सूर्यदेव का सानिध्य प्राप्त हो गया॥ 23-24॥ | mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दोषं परिहरन्ती च पितुश्चारित्र्यरक्षिणी।
कथं नु सुकृतं मे स्यान्नापराधवती कथम्॥ २३॥
भवेयमिति संचिन्त्य ब्राह्मणं तं नमस्य च।
कौतूहलात् तु तं लब्ध्वा बालिश्यादाचरं तदा।
कन्या सती देवमर्कमासादयमहं तत:॥ २४॥
अनुवाद
मैं अपने मार्ग में आने वाले सब प्रकार के दोषों को दूर करके पिता की दृष्टि में अपने सदाचार की रक्षा करती रही। मैंने सोचा, मैं क्या करूँ, जिससे पुण्य कमा सकूँ और अपराधी न बनूँ। ऐसा सोचकर मैंने मन ही मन उस ब्राह्मण देवता को प्रणाम किया और उस मन्त्र को पाकर, कौतूहलवश तथा बुद्धिहीन होकर उसका प्रयोग करने लगी। उसका फल यह हुआ कि मुझे अपनी कन्या अवस्था में ही भगवान सूर्यदेव का सानिध्य प्राप्त हो गया॥ 23-24॥
I kept protecting my good conduct in the eyes of my father by getting rid of all kinds of faults that came my way. I thought, what should I do, so that I can earn virtue and not become a criminal. Thinking this, I silently saluted that Brahmin god and on getting that mantra, out of curiosity and lack of wisdom, I started using it. Its result was that I got the union of Lord Suryadev in my girlhood itself.॥ 23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥