Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.144.2: हे अमर पुत्रों को जन्म देने वाली देवी! आप जानती हैं कि मेरी सदैव यही इच्छा रही है कि कौरवों और पांडवों में युद्ध न हो। मैं बार-बार यही प्रार्थना कर रही हूँ; किन्तु दुर्योधन मेरी बात नहीं सुनता॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जानासि मे जीवपुत्रि भावं नित्यमविग्रहे।
क्रोशतो न च गृह्णीते वचनं मे सुयोधन:॥ २॥
अनुवाद
हे अमर पुत्रों को जन्म देने वाली देवी! आप जानती हैं कि मेरी सदैव यही इच्छा रही है कि कौरवों और पांडवों में युद्ध न हो। मैं बार-बार यही प्रार्थना कर रही हूँ; किन्तु दुर्योधन मेरी बात नहीं सुनता॥ 2॥
O Goddess who gives birth to immortal sons! You know that it has always been my wish that there should be no war between the Kauravas and the Pandavas. I have been calling for this repeatedly; but Duryodhan does not listen to me.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥