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mahabharat 5.144.17-19h: वह हमेशा से पांडवों को भारी नुकसान पहुँचाने पर अड़ा रहा है। इसके अलावा, कर्ण भी बहुत बलवान है। यह बात अभी मेरे दिल को जला रही है। खैर, आज मैं कर्ण के पास जाकर पांडवों के प्रति उसका मन प्रसन्न करूँगा और उससे वास्तविक रिश्ते का परिचय देते हुए बात करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  5.144.17-19h 
महत्यनर्थे निर्बन्धी बलवांश्च विशेषत:॥ १७॥
कर्ण: सदा पाण्डवानां तन्मे दहति सम्प्रति।
आशंसे त्वद्य कर्णस्य मनोऽहं पाण्डवान् प्रति॥ १८॥
प्रसादयितुमासाद्य दर्शयन्ती यथातथम्।
 
 
अनुवाद
वह हमेशा से पांडवों को भारी नुकसान पहुँचाने पर अड़ा रहा है। इसके अलावा, कर्ण भी बहुत बलवान है। यह बात अभी मेरे दिल को जला रही है। खैर, आज मैं कर्ण के पास जाकर पांडवों के प्रति उसका मन प्रसन्न करूँगा और उससे वास्तविक रिश्ते का परिचय देते हुए बात करूँगा।
 
He has always been adamant to cause great harm to the Pandavas. Besides, Karna is also very strong. This thing burns my heart right now. Well, today I will go to Karna to make his heart happy towards the Pandavas and will talk to him while introducing the real relationship.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)