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mahabharat 5.144.14-15h: यह सब सोचकर मेरा हृदय दुःख से भर गया है। पितामह भीष्म, शान्तनुपुत्र, योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रोण और कर्ण भी दुर्योधन के लिए युद्धभूमि में उतरेंगे; अतः वे मेरे भय को और बढ़ा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.144.14-15h 
इति मे चिन्तयन्त्या वै हृदि दु:खं प्रवर्तते।
पितामह: शान्तनव आचार्यश्च युधां पति:॥ १४॥
कर्णश्च धार्तराष्ट्रार्थं वर्धयन्ति भयं मम।
 
 
अनुवाद
यह सब सोचकर मेरा हृदय दुःख से भर गया है। पितामह भीष्म, शान्तनुपुत्र, योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रोण और कर्ण भी दुर्योधन के लिए युद्धभूमि में उतरेंगे; अतः वे मेरे भय को और बढ़ा रहे हैं।
 
My heart is filled with sorrow at the thought of all this. Grandfather Bhishma, the son of Shantanu, the best among warriors, Drona and Karna will also enter the battlefield for Duryodhan; hence they are only increasing my fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)