Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.144.13: मैं युद्ध में एक बड़ा दोष अवश्य देखता हूँ; किन्तु यदि युद्ध न भी हो, तो भी पाण्डवों की पराजय स्पष्ट है। दरिद्र होकर मरना तो अच्छा है; किन्तु स्वजनों का नाश करके विजय प्राप्त करना कभी अच्छा नहीं होता॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्ये दोषं ध्रुवं युद्धे तथायुद्धे पराभवम्।
अधनस्य मृतं श्रेयो न हि ज्ञातिक्षयो जय:॥ १३॥
अनुवाद
मैं युद्ध में एक बड़ा दोष अवश्य देखता हूँ; किन्तु यदि युद्ध न भी हो, तो भी पाण्डवों की पराजय स्पष्ट है। दरिद्र होकर मरना तो अच्छा है; किन्तु स्वजनों का नाश करके विजय प्राप्त करना कभी अच्छा नहीं होता॥13॥
‘I certainly see a great flaw in war; but even if there is no war, the defeat of the Pandavas is clear. Being poor and accepting death is good; but it is never good to win by destroying relatives.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥