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mahabharat 5.143.7: वृष्णिपुत्र! ये रोंगटे खड़े कर देने वाले कोलाहल दुर्योधन की पराजय और युधिष्ठिर की विजय की घोषणा करते प्रतीत होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.143.7 
पराजयं धार्तराष्ट्रे विजयं च युधिष्ठिरे।
शंसन्त इव वार्ष्णेय विविधा रोमहर्षणा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वृष्णिपुत्र! ये रोंगटे खड़े कर देने वाले कोलाहल दुर्योधन की पराजय और युधिष्ठिर की विजय की घोषणा करते प्रतीत होते हैं।
 
Son of Vrishni! These various hair-raising uproars seem to announce the defeat of Duryodhan and the victory of Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)