Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.143.6: मधुसूदन! मैं अनेक भयानक स्वप्न देखता हूँ। मैं भयंकर अपशकुन और भयंकर विपत्तियाँ देखता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.143.6 
स्वप्ना हि बहवो घोरा दृश्यन्ते मधुसूदन।
निमित्तानि च घोराणि तथोत्पाता: सुदारुणा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मैं अनेक भयानक स्वप्न देखता हूँ। मैं भयंकर अपशकुन और भयंकर विपत्तियाँ देखता हूँ।
 
‘Madhusudana! I see many horrific dreams. I see terrible omens and terrible calamities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)