तदनन्तर श्रीकृष्ण सात्यकि के साथ सारथि से बार-बार ‘चलो, चलें’ कहते हुए अत्यन्त तीव्र गति से उपप्लव्य नगर की ओर चलने लगे॥52॥
Thereafter, Shri Krishna along with Satyaki started moving towards Upaplavya city at a very fast speed, repeatedly saying 'Come on, let's go' to the charioteer. 52॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कर्णोपनिवादे कृष्णकर्णसंवादे त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें कर्णके द्वारा अपने अभिप्राय निवेदनके प्रसंगमें भगवद्वाक्यविषयक एक सौ तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)