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mahabharat 5.143.51: तत्पश्चात् राधानन्दन कर्ण अपने स्वर्ण-जटित रथ पर आरूढ़ होकर उदास मन से हमारे साथ लौट आये।   |   mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.143.51 
तत: स्वरथमास्थाय जाम्बूनदविभूषितम्।
सहास्माभिर्निववृते राधेयो दीनमानस:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राधानन्दन कर्ण अपने स्वर्ण-जटित रथ पर आरूढ़ होकर उदास मन से हमारे साथ लौट आये।
 
Thereafter, Radhanandana Karna, mounted on his gold-decorated chariot, returned with us, depressed-hearted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)