श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.143.49 
अथवा सङ्गम: कृष्ण स्वर्गे नो भविता ध्रुवम्।
तत्रेदानीं समेष्याम: पुन: सार्धं त्वयानघ॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
या श्री कृष्ण! अब तो स्वर्ग में ही हमारी मुलाकात होगी, यह निश्चित है। अनघ! वहाँ आज की तरह पुनः हमारी मुलाकात होगी। 49।
 
Or Shri Krishna! Now we will meet in heaven only, this is certain. Anagh! There we will meet you again like today. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)