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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन
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श्लोक 46
श्लोक
5.143.46
श्रीकृष्ण उवाच
उपस्थितविनाशेयं नूनमद्य वसुन्धरा।
यथा हि मे वच: कर्ण नोपैति हृदयं तव॥ ४६॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - कर्ण! निश्चय ही अब इस पृथ्वी के विनाश का समय आ गया है; इसीलिए मेरी बातें तुम्हारे हृदय तक नहीं पहुँच रही हैं।
Shri Krishna said - Karna! Surely the time of destruction of this earth has arrived now; that is why my words are not reaching your heart.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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