श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.143.45 
अहं चान्ये च राजानो यच्च तत् क्षत्रमण्डलम्।
गाण्डीवाग्निं प्रवेक्ष्याम इति मे नास्ति संशय:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं है कि 'मैं', अन्य राजा और सम्पूर्ण क्षत्रिय समुदाय गाण्डीव अग्नि में प्रवेश करेंगे ॥45॥
 
There is no doubt that 'I', other kings and the entire Kshatriya community will enter the fire of Gandiva. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)