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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
5.143.4
असंशयमिदं कृष्ण महद् युद्धमुपस्थितम्।
पाण्डवानां कुरूणां च घोरं रुधिरकर्दमम्॥ ४॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! इसमें संदेह नहीं कि कौरवों और पाण्डवों में भयंकर युद्ध छिड़ गया है, जिससे रक्तपात की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी॥4॥
Sri Krishna! There is no doubt that a terrible war has arisen between the Kauravas and the Pandavas, which will create a mess of blood. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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