श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.143.35 
उच्चं पर्वतमारूढो भीमकर्मा वृकोदर:।
गदापाणिर्नरव्याघ्रो ग्रसन्निव महीमिमाम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भयानक कर्म करने वाले पुरुषों में श्रेष्ठ भीमसेन को भी स्वप्न में देखा गया है, जो हाथ में गदा लिए हुए ऊँचे पर्वत पर आरूढ़ होकर पृथ्वी को तहस-नहस कर रहे हैं ॥35॥
 
Bhimsen, the best of men who performs terrible deeds, has also been seen in the dream, mounted on a high mountain with a mace in his hand, ravaging the earth. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)