श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.143.34 
युधिष्ठिरो मया दृष्टो ग्रसमानो वसुन्धराम्।
त्वया दत्तामिमां व्यक्तं भोक्ष्यते स वसुन्धराम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मैंने यह भी देखा है कि युधिष्ठिर इस पृथ्वी का उपभोग कर रहे हैं; अतः यह निश्चित है कि वे आपकी दी हुई पृथ्वी का उपभोग करेंगे॥ 34॥
 
I have also seen that Yudhishthira is devouring this earth; therefore, it is certain that he will enjoy the earth given by you.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)