श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.143.32 
तव चापि मया कृष्ण स्वप्नान्ते रुधिराविला।
अन्त्रेण पृथिवी दृष्टा परिक्षिप्ता जनार्दन॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! श्रीकृष्ण! स्वप्न के अंत में मैंने आपकी यह पृथ्वी भी रक्त से सनी हुई और आँतों से भरी हुई देखी।
 
Janardan! Sri Krishna! At the end of the dream I saw this earth of yours also soiled with blood and covered with intestines.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)