vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन
»
श्लोक 30
श्लोक
5.143.30
सहस्रपादं प्रासादं स्वप्नान्ते स्म युधिष्ठिर:।
अधिरोहन् मया दृष्ट: सह भ्रातृभिरच्युत॥ ३०॥
अनुवाद
अच्युत! स्वप्न के अन्तिम भाग में मैंने युधिष्ठिर को अपने भाइयों के साथ एक सहस्त्र स्तम्भों वाले महल पर चढ़ते देखा।
Achyuta! In the last part of the dream, I saw Yudhishthira climbing a palace with a thousand pillars along with his brothers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×