श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.143.29 
प्रदीप्ताश्च दिश: सर्वा धार्तराष्ट्रस्य माधव।
महद् भयं वेदयन्ति तस्मिन्नुत्पातदर्शने॥ २९॥
 
 
अनुवाद
माधव! दुर्योधन यह उत्पात अवश्य देख रहा है। उसे तो सारी दिशाएँ प्रज्वलित और महाभय का संकेत दे रही हैं।
 
‘Madhava! Duryodhan surely sees these riots. For him all the directions seem to be ablaze and are signalling great fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)