Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.143.28: ‘श्रीकृष्ण! पूर्व दिशा लाल दिखाई देती है, दक्षिण दिशा काली दिखाई देती है, पश्चिम दिशा कच्चे घड़े के समान मैली दिखाई देती है और उत्तर दिशा शंख के समान श्वेत दिखाई देती है। इस प्रकार इन दिशाओं के रंग भिन्न-भिन्न बताए गए हैं॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘श्रीकृष्ण! पूर्व दिशा लाल दिखाई देती है, दक्षिण दिशा काली दिखाई देती है, पश्चिम दिशा कच्चे घड़े के समान मैली दिखाई देती है और उत्तर दिशा शंख के समान श्वेत दिखाई देती है। इस प्रकार इन दिशाओं के रंग भिन्न-भिन्न बताए गए हैं॥ 28॥
‘Sri Krishna! The east direction appears red, the south direction appears black, the west direction appears muddy like unbaked earthen pots and the north direction appears white like a conch shell. In this manner, these directions have been described to have different colours.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥