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mahabharat 5.143.27: मधुसूदन! दुर्योधन पहले तो ब्राह्मणों से घृणा करता है, फिर अपने ज्येष्ठों और अपने समर्पित सेवकों के साथ विश्वासघात करता है। यह उसकी पराजय का प्रतीक है।   |   mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.143.27 
ब्राह्मणान् प्रथमं द्वेष्टि गुरूंश्च मधुसूदन।
भृत्यान् भक्तिमतश्चापि तत् पराभवलक्षणम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! दुर्योधन पहले तो ब्राह्मणों से घृणा करता है, फिर अपने ज्येष्ठों और अपने समर्पित सेवकों के साथ विश्वासघात करता है। यह उसकी पराजय का प्रतीक है।
 
Madhusudan! First Duryodhan hates the Brahmins; then he betrays his elders and his devoted servants. This is a sign of his defeat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)