श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.143.20 
धार्तराष्ट्रस्य सैन्येषु भेरीणां नास्ति नि:स्वन:।
अनाहता: पाण्डवानां नदन्ति पटहा: किल॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्योधन की सेना में तुरही बजाने पर भी उसकी ध्वनि नहीं होती, जबकि पाण्डवों की तुरही बिना बजाए ही बजने लगती है।
 
‘The sound of the trumpets does not appear even when played in Duryodhan's army, whereas the trumpets of the Pandavas start ringing without being played.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)