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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
5.143.18
मयूरा: पुण्यशकुना हंससारसचातका:।
जीवंजीवकसङ्घाश्चाप्यनुगच्छन्ति पाण्डवान्॥ १८॥
अनुवाद
मोर, शुभ शकुन बताने वाला मुर्गा, हंस, सारस, चातक और चकोर ये सभी पाण्डवों के पीछे-पीछे चलते हैं॥18॥
‘The peacock, the cock which indicates good omen, the swans, the cranes, the Chatak and the Chakoras follow the Pandavas.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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