श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.143.12 
निष्टनन्ति च मातङ्गा मुञ्चन्त्यश्रूणि वाजिन:।
पानीयं यवसं चापि नाभिनन्दन्ति माधव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
माधव! हाथी आपस में टकरा रहे हैं और भयंकर आवाजें निकाल रहे हैं। घोड़े अपनी आँखों से आँसू बहा रहे हैं। वे घास और पानी भी सुख से ग्रहण नहीं कर रहे हैं॥12॥
 
‘Madhava! The elephants are clashing with each other and making ugly noises. The horses are shedding tears from their eyes. They are not even taking grass and water happily.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)