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mahabharat 5.143.11: चन्द्रमा पर का काला धब्बा प्रायः लुप्त हो गया है, राहु सूर्य के निकट आ रहा है। ये उल्काएँ आकाश से गिर रही हैं, वज्र के समान शब्द हो रहे हैं और पृथ्वी हिलती हुई प्रतीत हो रही है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.143.11 
सोमस्य लक्ष्म व्यावृत्तं राहुरर्कमुपैति च।
दिवश्चोल्का: पतन्त्येता: सनिर्घाता: सकम्पना:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रमा पर का काला धब्बा प्रायः लुप्त हो गया है, राहु सूर्य के निकट आ रहा है। ये उल्काएँ आकाश से गिर रही हैं, वज्र के समान शब्द हो रहे हैं और पृथ्वी हिलती हुई प्रतीत हो रही है।॥11॥
 
‘The black spot on the moon has almost disappeared, Rahu is approaching the sun. These meteors are falling from the sky, there are sounds like thunderbolts and the earth seems to be shaking.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)