श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.143.10 
नूनं महद्भयं कृष्ण कुरूणां समुपस्थितम्।
विशेषेण हि वार्ष्णेय चित्रां पीडयते ग्रह:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! कौरवों पर निश्चय ही महान भय छा गया है। विशेषतः चित्रा को महापात नामक ग्रह कष्ट दे रहा है (जो राजाओं के विनाश का सूचक है)।॥10॥
 
Vrishninandan Sri Krishna! Certainly a great fear has descended upon the Kauravas. Especially the planet named 'Mahapaat' is troubling Chitra (which is an indicator of the destruction of kings).॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)