श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 143: कर्णके द्वारा पाण्डवोंकी विजय और कौरवोंकी पराजय सूचित करनेवाले लक्षणों एवं अपने स्वप्नका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.143.1 
संजय उवाच
केशवस्य तु तद् वाक्यं कर्ण:श्रुत्वा हितं शुभम्।
अब्रवीदभिसम्पूज्य कृष्णं तं मधुसूदनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! भगवान केशव के हितकारी और मंगलमय वचन सुनकर कर्ण ने मधुसूदन श्रीकृष्ण का आदर करते हुए इस प्रकार कहा -॥1॥
 
Sanjaya says - O King! Upon hearing Lord Keshav's beneficial and auspicious words, Karna, showing respect for Madhusudan Sri Krishna, spoke thus -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)