श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.142.4 
दिव्या माया विहिता भौमनेन
समुच्छ्रिता इन्द्रकेतुप्रकाशा।
दिव्यानि भूतानि जयावहानि
दृश्यन्ति चैवात्र भयानकानि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विश्वकर्मा ने उस ध्वजा में दिव्य माया रची है। वह ऊँचा ध्वज इन्द्र के ध्वज के समान चमक रहा है। उस पर विजय दिलाने वाले दिव्य एवं भयंकर प्राणी दिखाई दे रहे हैं।॥4॥
 
Vishwakarma has created divine illusion in that flag. That tall flag shines like Indra's flag. On it, divine and fearsome creatures that help in achieving victory are visible. ॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas