श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.142.3 
ध्रुवो जय: पाण्डवानामितीदं
न संशय: कश्चन विद्यतेऽत्र।
जयध्वजो दृश्यते पाण्डवस्य
समुच्छ्रितो वानरराज उग्र:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों की विजय अवश्यम्भावी है। इसमें कोई संदेह नहीं है। पाण्डु नन्दन अर्जुन द्वारा वानरराज हनुमान को भेंट की गई वह भयंकर विजय-ध्वजा बहुत ऊँची प्रतीत होती है। 3॥
 
The victory of Pandavas is inevitable. There is no doubt about this. That terrible victory flag presented by Pandu Nandan Arjun to the monkey king Hanuman appears very high. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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