श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.142.2 
श्रीभगवानुवाच
अपि त्वां न लभेत् कर्ण राज्यलम्भोपपादनम्।
मया दत्तां हि पृथिवीं न प्रशासितुमिच्छसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - कर्ण ! ऐसा प्रतीत होता है कि मैं जो राज्य प्राप्ति का उपाय तुम्हें बता रहा हूँ, वह तुम्हें स्वीकार्य नहीं है। तुम मेरे द्वारा दी गई पृथ्वी पर शासन नहीं करना चाहते।॥ 2॥
 
Sri Bhagavan said - Karna! It seems that the method of attaining the kingdom that I am telling you is not acceptable to you. You do not want to rule the earth given to you by me.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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