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mahabharat 5.142.17: वन सभी प्रकार की औषधियों, फल-फूलों से समृद्ध हो गया है, धान के खेतों में प्रचुर मात्रा में फल लग गए हैं, मक्खियों की संख्या बहुत कम हो गई है, जमीन पर कीचड़ का नामोनिशान नहीं है। पानी स्वच्छ और स्वादिष्ट लग रहा है, इस सुखद समय में न तो अधिक गर्मी है और न ही अधिक सर्दी (यह मार्गशीर्ष का महीना है)।   |   mahabharat अध्याय 5.142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.142.17 
सर्वौषधिवनस्फीत: फलवानल्पमक्षिक:।
निष्पङ्को रसवत्तोयो नात्युष्णशिशिर: सुख:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वन सभी प्रकार की औषधियों, फल-फूलों से समृद्ध हो गया है, धान के खेतों में प्रचुर मात्रा में फल लग गए हैं, मक्खियों की संख्या बहुत कम हो गई है, जमीन पर कीचड़ का नामोनिशान नहीं है। पानी स्वच्छ और स्वादिष्ट लग रहा है, इस सुखद समय में न तो अधिक गर्मी है और न ही अधिक सर्दी (यह मार्गशीर्ष का महीना है)।
 
‘The forest has become prosperous with all kinds of medicinal herbs and fruits and flowers, the paddy fields have borne abundant fruits, the number of flies has reduced considerably, there is no trace of mud on the ground. The water appears clean and tasty, in this pleasant time there is neither too much heat nor too much cold (this is the month of Margashirsha).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)