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mahabharat 5.142.16: कर्ण! तुम यहाँ से जाकर आचार्य द्रोण, शान्तनुनन्दन भीष्म और कृपाचार्य से कहो कि 'यह महीना बड़ा सुखद है। इस महीने में पशुओं के लिए घास और जलाने के लिए लकड़ी आसानी से मिल जाती है।॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 5.142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.142.16 
ब्रूया: कर्ण इतो गत्वा द्रोणं शान्तनवं कृपम्।
सौम्योऽयं वर्तते मास: सुप्रापयवसेन्धन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! तुम यहाँ से जाकर आचार्य द्रोण, शान्तनुनन्दन भीष्म और कृपाचार्य से कहो कि 'यह महीना बड़ा सुखद है। इस महीने में पशुओं के लिए घास और जलाने के लिए लकड़ी आसानी से मिल जाती है।॥ 16॥
 
Karna! You go from here and tell Acharya Drona, Shantanu Nandan Bhishma and Kripacharya that 'This is a pleasant month. In this month, grass for animals and wood for burning can be easily found.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)