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mahabharat 5.142.14-15: जब रणभूमि में अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार तीव्र गति को पहुँच जाएगा (भयंकर होने लगेगा) और माद्री के पराक्रमी पुत्र नकुल और सहदेव शत्रु योद्धाओं के रथों को नष्ट करते हुए दो हाथियों के समान धृतराष्ट्र के पुत्रों की सेना को व्याकुल करने लगेंगे और जब तुम यह स्थिति अपनी आँखों से देखोगे, तब तुम्हारे सामने न तो सत्ययुग रहेगा, न त्रेतायुग और न ही द्वापर युग ॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 5.142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.142.14-15 
यदा द्रक्ष्यसि संग्रामे माद्रीपुत्रौ महाबलौ।
वाहिनीं धार्तराष्ट्राणां क्षोभयन्तौ गजाविव॥ १४॥
विगाढे शस्त्रसम्पाते परवीररथारुजौ।
न तदा भविता त्रेता न कृतं द्वापरं न च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब रणभूमि में अस्त्र-शस्त्रों का प्रहार तीव्र गति को पहुँच जाएगा (भयंकर होने लगेगा) और माद्री के पराक्रमी पुत्र नकुल और सहदेव शत्रु योद्धाओं के रथों को नष्ट करते हुए दो हाथियों के समान धृतराष्ट्र के पुत्रों की सेना को व्याकुल करने लगेंगे और जब तुम यह स्थिति अपनी आँखों से देखोगे, तब तुम्हारे सामने न तो सत्ययुग रहेगा, न त्रेतायुग और न ही द्वापर युग ॥14-15॥
 
When the attack of weapons on the battlefield will reach an intense stage (will start happening fiercely) and the mighty sons of Madri, Nakula and Sahadeva, destroying the chariots of the enemy warriors, will start disturbing the army of the sons of Dhritarashtra like two elephants and when you will see this situation with your own eyes, then neither Satya Yuga, nor Treta Yuga nor Dvapara Yuga will remain before you. ॥14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)