Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.142.12-13: जब तुम देखोगे कि ज्यों ही आचार्य द्रोण, शान्तनु नन्दन भीष्म, कृपाचार्य, राजा दुर्योधन और सिन्धु नरेश जयद्रथ युद्ध के लिए आगे बढ़े, त्यों ही सव्यसाची अर्जुन ने तुरन्त उनकी गति रोक दी, तब तुम अवाक रह जाओगे और उस समय तुम सत्ययुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग के विषय में कुछ भी नहीं समझ सकोगे ॥12-13॥ | mahabharat अध्याय 5.142: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा द्रक्ष्यसि संग्रामे द्रोणं शान्तनवं कृपम्।
सुयोधनं च राजानं सैन्धवं च जयद्रथम्॥ १२॥
युद्धायापततस्तूर्णं वारितान् सव्यसाचिना।
न तदा भविता त्रेता न कृतं द्वापरं न च॥ १३॥
अनुवाद
जब तुम देखोगे कि ज्यों ही आचार्य द्रोण, शान्तनु नन्दन भीष्म, कृपाचार्य, राजा दुर्योधन और सिन्धु नरेश जयद्रथ युद्ध के लिए आगे बढ़े, त्यों ही सव्यसाची अर्जुन ने तुरन्त उनकी गति रोक दी, तब तुम अवाक रह जाओगे और उस समय तुम सत्ययुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग के विषय में कुछ भी नहीं समझ सकोगे ॥12-13॥
When you will see that as soon as Acharya Drona, Shantanu Nandan Bhishma, Kripacharya, King Duryodhan and Sindhu King Jayadrath advanced for the battle, Savyasachi Arjun immediately stopped their movement, then you will be left speechless and at that time you will not be able to understand anything about Satya Yuga, Treta Yuga and Dwapara Yuga. ॥12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥