Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.141.7: अतः मुझ जैसा धार्मिक पुरुष, जो धर्म-ग्रन्थों को सुनने में सदैव तत्पर रहता है, राधा के मुख से निवाला कैसे छीन सकता हूँ? (मैं इतना निर्दयी कैसे हो सकता हूँ कि उसका पालन-पोषण करने के स्थान पर उसे त्याग दूँ?)॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः मुझ जैसा धार्मिक पुरुष, जो धर्म-ग्रन्थों को सुनने में सदैव तत्पर रहता है, राधा के मुख से निवाला कैसे छीन सकता हूँ? (मैं इतना निर्दयी कैसे हो सकता हूँ कि उसका पालन-पोषण करने के स्थान पर उसे त्याग दूँ?)॥ 7॥
Therefore, how can a religious man like me, who is always ready to listen to religious texts, snatch the morsel from Radha's mouth? (How can I be cruel enough to abandon her instead of nurturing her?)॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥