Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.141.57: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले केशव! इस उपदेश को सदैव गुप्त रखकर तुम कुन्तीपुत्र अर्जुन को मेरे साथ युद्ध करने के लिए ले आओ ॥ 57॥ | mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले केशव! इस उपदेश को सदैव गुप्त रखकर तुम कुन्तीपुत्र अर्जुन को मेरे साथ युद्ध करने के लिए ले आओ ॥ 57॥
O Kesava, who torments the enemies! Keeping this advice always secret, you should bring Arjuna, the son of Kunti, to fight with me. ॥ 57॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कर्णोपनिवादे एकचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें कर्णके द्वारा अपने निश्चित विचारका प्रतिपादनविषयक एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥