Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.141.52: क्षत्रियशिरोमणि मधुसूदन! शांति स्थापना के आपके प्रयत्नों से ऐसा न हो कि विद्वान और वृद्ध क्षत्रिय व्यर्थ ही मर जाएँ (युद्ध में शस्त्रों से होने वाली मृत्यु से वंचित हो जाएँ)। 52॥ | mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विद्यावृद्धा वयोवृद्धा: क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभ।
वृथा मृत्युं न कुर्वीरंस्त्वत्कृते मधुसूदन॥ ५२॥
अनुवाद
क्षत्रियशिरोमणि मधुसूदन! शांति स्थापना के आपके प्रयत्नों से ऐसा न हो कि विद्वान और वृद्ध क्षत्रिय व्यर्थ ही मर जाएँ (युद्ध में शस्त्रों से होने वाली मृत्यु से वंचित हो जाएँ)। 52॥
Kshatriyashiromani Madhusudan! Due to your efforts to establish peace, it may not happen that learned and elderly Kshatriyas die in vain (they are deprived of death caused by weapons in war). 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥