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mahabharat 5.141.50-51: केशव! जब धृतराष्ट्र के पुत्रों और पौत्रों की पुत्रवधुएँ, जिनके पति, पुत्र और संरक्षक मारे गए होंगे, गांधारी के साथ एकत्रित होकर कुत्तों, गिद्धों और जंगली पक्षियों से भरी हुई रणभूमि में रोती हुई घूमेंगी, हे जनार्दन! यही उस यज्ञ का आभृतस्नान होगा।   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.141.50-51 
स्नुषाश्च प्रस्नुषाश्चैव धृतराष्ट्रस्य सङ्गता:।
हतेश्वरा नष्टपुत्रा हतनाथाश्च केशव॥ ५०॥
रुदत्य: सह गान्धार्या श्वगृध्रकुरराकुले।
स यज्ञेऽस्मिन्नवभृथो भविष्यति जनार्दन॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
केशव! जब धृतराष्ट्र के पुत्रों और पौत्रों की पुत्रवधुएँ, जिनके पति, पुत्र और संरक्षक मारे गए होंगे, गांधारी के साथ एकत्रित होकर कुत्तों, गिद्धों और जंगली पक्षियों से भरी हुई रणभूमि में रोती हुई घूमेंगी, हे जनार्दन! यही उस यज्ञ का आभृतस्नान होगा।
 
Keshav! When the daughters-in-law of the sons and grandsons of Dhritarashtra, whose husbands, sons and guardians would have been killed, gather with Gandhari and roam weeping in the battlefield filled with dogs, vultures and feral birds, Janardan! That will be the Aabhrithasnaan of that yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)