Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.141.44: श्री कृष्ण! वे तेजस्वी वीर धृष्टद्युम्न, जो श्रौत यज्ञ के प्रारम्भ में अग्निकुण्ड से साक्षात् प्रकट हुए थे, इस यज्ञ की दक्षिणा का कार्य करेंगे ॥44॥ | mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दक्षिणा त्वस्य यज्ञस्य धृष्टद्युम्न: प्रतापवान्।
वैतानिके कर्ममुखे जातो य: कृष्ण पावकात्॥ ४४॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! वे तेजस्वी वीर धृष्टद्युम्न, जो श्रौत यज्ञ के प्रारम्भ में अग्निकुण्ड से साक्षात् प्रकट हुए थे, इस यज्ञ की दक्षिणा का कार्य करेंगे ॥44॥
Sri Krishna! That glorious hero Dhrishtadyumna, who had personally appeared from the fire pit at the beginning of the Shrauta Yagya, will perform the task of Dakshina of this Yagya. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥