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mahabharat 5.141.4: श्री कृष्ण! मेरा जन्म इसी प्रकार हुआ है। अतः मैं धर्म से पाण्डुपुत्र हूँ; किन्तु कुन्तीदेवी ने मुझे इस प्रकार त्याग दिया कि मैं सुरक्षित नहीं रह सका॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.141.4 
सोऽस्मि कृष्ण तथा जात: पाण्डो: पुत्रोऽस्मि धर्मत:।
कुन्त्या त्वहमपाकीर्णो यथा न कुशलं तथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! मेरा जन्म इसी प्रकार हुआ है। अतः मैं धर्म से पाण्डुपुत्र हूँ; किन्तु कुन्तीदेवी ने मुझे इस प्रकार त्याग दिया कि मैं सुरक्षित नहीं रह सका॥4॥
 
Sri Krishna! This is how I was born. Hence I am the son of Pandu by religion; but Kuntidevi abandoned me in such a way that I could not remain safe. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)