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mahabharat 5.141.39: श्री कृष्ण! उस यज्ञ में तलवार कपाल होगी, शत्रुओं के सिर आहुति होंगे और रक्त ही आहुति होगी ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.141.39 
असयोऽत्र कपालानि पुरोडाशा: शिरांसि च।
हविस्तु रुधिरं कृष्ण तस्मिन् यज्ञे भविष्यति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! उस यज्ञ में तलवार कपाल होगी, शत्रुओं के सिर आहुति होंगे और रक्त ही आहुति होगी ॥39॥
 
Sri Krishna! In that Yagya, the sword will be the skull, the heads of the enemies will be the offering and the blood will be the offering. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)