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mahabharat 5.141.35: मधुसूदन! शंख, तुरही और नरसिंगों की ध्वनि तथा सिंह का ऊँचे स्वर में दहाड़ना सुब्रह्मण्य की ध्वनि होगी।   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.141.35 
शङ्खशब्दा: समुरजा भेर्यश्च मधुसूदन।
उत्कृष्टसिंहनादश्च सुब्रह्मण्यो भविष्यति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! शंख, तुरही और नरसिंगों की ध्वनि तथा सिंह का ऊँचे स्वर में दहाड़ना सुब्रह्मण्य की ध्वनि होगी।
 
Madhusudan! The sounds of the conches, trumpets and trumpets and the roar of the lion in a loud voice will be the sound of Subrahmanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)