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mahabharat 5.141.21: यदि अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर को यह पता चल जाए कि मैं (कर्ण) कुंती का प्रथम पुत्र हूँ, तो वे राज्य स्वीकार नहीं करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.141.21 
यदि जानाति मां राजा धर्मात्मा संयतेन्द्रिय:।
कुन्त्या: प्रथमजं पुत्रं न स राज्यं ग्रहीष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर को यह पता चल जाए कि मैं (कर्ण) कुंती का प्रथम पुत्र हूँ, तो वे राज्य स्वीकार नहीं करेंगे।
 
If the virtuous King Yudhishthira, who controls his senses, comes to know that I (Karna) am the first son of Kunti, then he will not accept the kingdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)