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mahabharat 5.141.2: श्री कृष्ण! जैसा आप मानते हैं, धर्म-शास्त्रों के निर्णय के अनुसार मैं पाण्डुपुत्र हूँ। मैं इन सब बातों को भली-भाँति जानता और समझता हूँ॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.141.2 
सर्वं चैवाभिजानामि पाण्डो: पुत्रोऽस्मि धर्मत:।
निश्चयाद् धर्मशास्त्राणां यथा त्वं कृष्ण मन्यसे॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! जैसा आप मानते हैं, धर्म-शास्त्रों के निर्णय के अनुसार मैं पाण्डुपुत्र हूँ। मैं इन सब बातों को भली-भाँति जानता और समझता हूँ॥ 2॥
 
Shri Krishna! As you believe, according to the decision of the religious scriptures, I am the son of Pandu. I know and understand all these things very well.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)