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mahabharat 5.141.14: वहाँ मैंने सूतों (वर के पुत्रों) के साथ रहकर अनेक यज्ञ किये और उनके साथ रहकर अनेक पारिवारिक अनुष्ठान तथा विवाह संस्कार सम्पन्न किये ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.141.14 
इष्टं च बहुभिर्यज्ञै: सह सूतैर्मयासकृत्।
आवाहाश्च विवाहाश्च सह सूतैर्मया कृता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मैंने सूतों (वर के पुत्रों) के साथ रहकर अनेक यज्ञ किये और उनके साथ रहकर अनेक पारिवारिक अनुष्ठान तथा विवाह संस्कार सम्पन्न किये ॥14॥
 
There I performed many sacrifices in the company of the Sutas (sons of the groom), and staying with them I performed numerous family rituals and marriage ceremonies. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)