Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.141.10-11: श्री कृष्ण! जब मैं युवावस्था में पहुँचा, तो अधिरथ ने मेरा विवाह सूत जाति की अनेक कन्याओं से कराया। अब उनसे मेरे पुत्र और पौत्र हैं। जनार्दन! मेरा मन उन स्त्रियों की ओर कामवश आकृष्ट हो गया है। | mahabharat अध्याय 5.141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भार्याश्चोढा मम प्राप्ते यौवने तत्परिग्रहात्॥ १०॥
तासु पुत्राश्च पौत्राश्च मम जाता जनार्दन।
तासु मे हृदयं कृष्ण संजातं कामबन्धनम्॥ ११॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! जब मैं युवावस्था में पहुँचा, तो अधिरथ ने मेरा विवाह सूत जाति की अनेक कन्याओं से कराया। अब उनसे मेरे पुत्र और पौत्र हैं। जनार्दन! मेरा मन उन स्त्रियों की ओर कामवश आकृष्ट हो गया है।
Shri Krishna! When I reached my youth, Adhiratha got me married to several girls of the Suta caste. Now I have sons and grandsons from them. Janardan! My heart has been attracted towards those women with lust.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥